लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मामलों को आधार बनाकर देश की आस्था और राष्ट्रीय अस्मिता पर प्रहार करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इस घटना की आड़ में धार्मिक स्थलों और सनातन आस्था को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लखनऊ में आयोजित एक निजी समाचार चैनल के विशेष कॉन्क्लेव 'ऊंचाइयों पर यूपी' को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में हुए बदलावों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और डबल इंजन सरकार की नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।
राम मंदिर मामले पर दिया स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित एसआईटी पूरी निष्पक्षता से जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले में नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफा भी दिया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस प्रकरण का इस्तेमाल हिंदू धार्मिक स्थलों की छवि धूमिल करने के लिए कर रहे हैं। योगी ने कहा कि यही वे लोग हैं जो पहले गरीबों के अधिकारों का हनन करते थे और धार्मिक स्थलों की गरिमा से भी खिलवाड़ करने का प्रयास करते रहे।
'2017 से पहले असुरक्षा, अब निवेशकों की पहली पसंद यूपी'
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश दंगों, अपराध और असुरक्षा की पहचान बन चुका था। व्यापारी, किसान और बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे। कई परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए राज्य से बाहर भेजने को मजबूर थे।
उन्होंने कहा कि अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और इसी का परिणाम है कि प्रदेश को अब तक लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है।
एमएसएमई और ओडीओपी से बढ़ा रोजगार
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में 'एक जिला-एक उत्पाद (ODOP)' योजना ने पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान दी है। वाराणसी की साड़ी, भदोही के कालीन, फिरोजाबाद का ग्लास, मुरादाबाद का पीतल और लखनऊ की चिकनकारी जैसे उत्पादों को वैश्विक बाजार मिला है।
उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जिनके माध्यम से सवा तीन करोड़ से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। साथ ही 75 जिलों के 79 उत्पादों को जीआई टैग से जोड़ा गया है।
तीन गुना हुई अर्थव्यवस्था, बढ़ी प्रति व्यक्ति आय
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016-17 में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगभग 12 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर करीब 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रदेश का वार्षिक बजट भी तीन लाख करोड़ रुपये से बढ़कर नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने बताया कि प्रति व्यक्ति आय 43 हजार रुपये से बढ़कर 1.20 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है, जबकि बेरोजगारी दर 19 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत से भी कम रह गई है। महिला कार्यबल की भागीदारी भी 12 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और किसानों पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे अधिक एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और मेट्रो नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल है। गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने प्रदेश की तस्वीर बदली है।
उन्होंने किसानों के लिए सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि 2017 के बाद से गन्ना किसानों को 3.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। प्रदेश देश में गन्ना, चीनी और एथेनॉल उत्पादन में पहले स्थान पर है। साथ ही 24 लाख हेक्टेयर भूमि को नई सिंचाई सुविधाओं से जोड़ा गया है।

National Desk
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