नई दिल्ली। जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने इसे गलत बताते हुए केंद्र सरकार पर शांतिपूर्ण विरोध को बलपूर्वक दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि मोदी सरकार की कार्यशैली "असत्य और हिंसा" पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अहिंसक अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाना उचित नहीं था और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वालों को दबाया नहीं जा सकता।
21वें दिन अस्पताल ले जाए गए वांगचुक
सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे। उनकी लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल लेकर गई।
दिल्ली पुलिस के अनुसार यह कदम चिकित्सकों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया। पुलिस ने कहा कि वांगचुक की तबीयत लगातार गिर रही थी, इसलिए उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से भी शांतिपूर्वक धरना स्थल खाली करने की अपील की।
अस्पताल ने बताया स्वास्थ्य स्थिर, लेकिन कमजोरी बरकरार
सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने बताया कि लंबे समय तक उपवास और शरीर में पानी की कमी के कारण सोनम वांगचुक काफी कमजोर हो गए हैं। हालांकि उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन स्वास्थ्य मानकों को सामान्य करने के लिए लगातार निगरानी और उपचार की आवश्यकता है।
उधर, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने अस्पताल में भर्ती कराने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी और निजी चिकित्सकों की सहमति के बिना कोई दवा या उपचार नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि हाईकोर्ट के आदेश में अस्पताल में भर्ती करने का स्पष्ट निर्देश नहीं था।
विपक्षी दलों ने भी जताया विरोध
वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की आलोचना की। आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) सहित कई दलों के नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज दबाने का प्रयास बताया।
कांग्रेस पहले ही इस आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा कर चुकी है। पार्टी नेताओं ने हाल के दिनों में जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात भी की थी और उनकी गिरती सेहत पर चिंता जताई थी।
20 जून से जारी है आंदोलन
शिक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं की न्यायिक जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च की भी घोषणा की थी।

National Desk
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