अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को अधिक सुदृढ़ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में पहुंचा दी है। इस पद के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि शनिवार को समाप्त हो गई। अब प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक में अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की चयन समिति योग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार कर रही है, जिसमें से तीन नाम ट्रस्टियों के समक्ष रखे जाएंगे। इसके बाद सर्वसम्मति से एक उम्मीदवार का चयन किए जाने की संभावना है।
वरिष्ठ अधिकारियों में दिखी दिलचस्पी
सीईओ पद के लिए देशभर से अपेक्षा से कहीं अधिक रुचि देखने को मिली है। जानकारी के अनुसार, आवेदन की अंतिम तिथि तक एक हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा निजी क्षेत्र में लंबे समय तक प्रबंधन का अनुभव रखने वाले कई पेशेवरों ने भी आवेदन किया है। आवेदकों में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर, अयोध्या में नेहरू युवा केंद्र के पूर्व जिला समन्वयक रामकिशोर यादव और व्यंग्यकार अरुणेश मिश्र सहित कई प्रमुख नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा सरकारी सेवा के अंतिम चरण में कार्यरत कुछ अधिकारियों ने भी इस पद के लिए आवेदन किया है।
एसआईटी की सिफारिश के बाद शुरू हुई प्रक्रिया
राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में सीईओ नियुक्त करने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि मंदिर के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए एक पेशेवर कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया जाए। इसके बाद 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी और औपचारिक रूप से आवेदन आमंत्रित किए गए।
तीन सदस्यीय समिति कर रही है उम्मीदवारों की जांच
सीईओ चयन प्रक्रिया की जिम्मेदारी ट्रस्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति को सौंपी गई है। यह समिति ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि के निर्देशन में सभी आवेदनों की समीक्षा कर रही है। समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी तथा एनआईटी रायपुर के पूर्व चेयरमैन सुरेश हावरे शामिल हैं। समिति उम्मीदवारों के प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल और सार्वजनिक जीवन में उनकी छवि का मूल्यांकन कर रही है। सूत्रों के अनुसार, चयन में उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनका सेवा रिकॉर्ड निष्कलंक रहा हो और जिन्हें बड़े धार्मिक संस्थानों, सरकारी संगठनों या कॉर्पोरेट संस्थाओं के संचालन का व्यापक अनुभव हो।
सीईओ के जिम्मे होंगे प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन
नियुक्त होने वाला सीईओ सीधे ट्रस्ट के महासचिव के प्रति जवाबदेह होगा। उसे मंदिर के दैनिक प्रशासन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, वित्तीय निगरानी, कर्मचारियों के समन्वय और विभिन्न प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके अलावा सीईओ को आवश्यकता के अनुसार अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े निर्णय लेने के अधिकार भी दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि इस पद के सृजन से मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी।
योग्यता और आयु सीमा पहले ही तय की गई थी
ट्रस्ट ने सीईओ पद के लिए स्पष्ट पात्रता मानदंड निर्धारित किए हैं। उम्मीदवार का हिंदू होना, न्यूनतम स्नातक होना तथा आयु 50 से 70 वर्ष के बीच होना अनिवार्य रखा गया है। साथ ही किसी बड़े सरकारी विभाग, सार्वजनिक संस्था, धार्मिक संगठन या निजी कंपनी में कम से कम 20 वर्षों का प्रबंधन अनुभव भी आवश्यक है। इन मानकों का उद्देश्य ऐसे अनुभवी व्यक्ति का चयन करना है, जो प्रशासनिक दक्षता के साथ मंदिर की धार्मिक गरिमा और श्रद्धालुओं की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य कर सके।
22 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें
सीईओ नियुक्ति के अलावा 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक में ट्रस्ट के रिक्त पदों पर नए सदस्यों के चयन पर भी चर्चा होने की संभावना है। वर्तमान में तीन पद खाली हैं, जिन्हें भरने की प्रक्रिया भी इसी बैठक में आगे बढ़ सकती है। राम मंदिर में पहली बार सीईओ की नियुक्ति को ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब सभी की नजर 22 जुलाई की बैठक पर है, जहां अंतिम चयन पर मुहर लग सकती है और मंदिर प्रबंधन को एक नया प्रशासनिक नेतृत्व मिल सकता है।

Editorial Team
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