नई दिल्ली: National Awards 2026: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में इस बार देशभक्ति, राष्ट्रवाद और वास्तविक जीवन की प्रेरक कहानियों पर आधारित फिल्मों का दबदबा देखने को मिला। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 'आर्टिकल 370' को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। वहीं इसी फिल्म में दमदार अभिनय के लिए यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया। पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही भारतीय सिनेमा की विविधता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्मों को नई पहचान मिली।
कार्तिक आर्यन और ममूटी बने संयुक्त सर्वश्रेष्ठ अभिनेता
इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान संयुक्त रूप से दो कलाकारों को दिया गया। बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन को फिल्म 'चंदू चैंपियन' में पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर की प्रेरणादायक भूमिका निभाने के लिए सम्मानित किया गया। वहीं मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को उनकी फिल्म 'ब्रमायुगम' में प्रभावशाली अभिनय के लिए यह पुरस्कार मिला। इसके अलावा 'भूल भुलैया 3' को सर्वश्रेष्ठ साउंड डिजाइनिंग का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला, जिससे कार्तिक आर्यन के लिए यह साल और भी खास बन गया।
'अमरन' के निर्देशक राजकुमार पेरियासामी को मिला सम्मान
निर्देशन की श्रेणी में राजकुमार पेरियासामी ने बाजी मारी। उनकी फिल्म 'अमरन' को बेहतरीन निर्देशन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। फिल्म को उसकी प्रभावशाली कहानी, तकनीकी गुणवत्ता और संवेदनशील प्रस्तुति के लिए सराहा गया। वहीं राजकुमार राव अभिनीत फिल्म 'श्रीकांत' को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। दृष्टिबाधित उद्योगपति श्रीकांत बोला के जीवन पर आधारित इस फिल्म के निर्देशक तुषार हीरानंदानी ने इसे पूरी टीम की मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म को पहले रूस में भी सम्मान मिला था और अब भारत में राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना पूरी टीम के लिए गर्व का विषय है।
रणदीप हुड्डा की पहली निर्देशित फिल्म को भी मिली पहचान
अभिनेता रणदीप हुड्डा को उनकी पहली निर्देशित फिल्म 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' के लिए सर्वश्रेष्ठ डेब्यू निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। रणदीप ने कहा कि यह फिल्म उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक रही। उन्होंने कहा कि एक अभिनेता, सह-लेखक और निर्देशक के रूप में उन्होंने इस फिल्म में अपना पूरा समर्पण दिया ताकि वीर सावरकर के जीवन और विचारों को ईमानदारी के साथ दर्शकों तक पहुंचाया जा सके।
यामी गौतम ने बताया करियर का सबसे यादगार पल
राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद अभिनेत्री यामी गौतम ने इसे अपने 14 वर्षों के फिल्मी सफर का सबसे बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उन्हें यह याद दिलाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और ईमानदारी कभी व्यर्थ नहीं जाती। यामी ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने काम को अपनी पहचान बनने दिया और यही सोच आज उन्हें इस मुकाम तक लेकर आई है। उन्होंने इस सम्मान को संघर्ष, धैर्य और सिनेमा के प्रति समर्पण का परिणाम बताया।
कार्तिक आर्यन ने परिवार के साथ साझा की खुशी
राष्ट्रीय पुरस्कार की घोषणा के बाद कार्तिक आर्यन ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा किया। वीडियो में वह अपने परिवार के साथ लैपटॉप पर पुरस्कारों की घोषणा देख रहे हैं। जैसे ही उनके नाम की घोषणा होती है, पूरा परिवार खुशी से झूम उठता है। कार्तिक ने लिखा कि यह उनके जीवन का वह सपना था, जो आखिरकार पूरा हो गया। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए दर्शकों, परिवार और पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।
ममूटी और अन्य कलाकारों ने भी जताई खुशी
ममूटी ने सोशल मीडिया पर फिल्म 'ब्रमायुगम' की तस्वीर साझा करते हुए अपनी पूरी टीम और अन्य विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने निर्देशक राहुल सदाशिवन का विशेष धन्यवाद करते हुए कहा कि यह किरदार निभाना उनके लिए यादगार अनुभव रहा।
गीतकार मनोज मुंतशिर ने भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों लेकर आया है। उन्होंने भारत सरकार और जूरी का आभार व्यक्त किया।
संजय मिश्रा और विजय गांगुली की भावुक प्रतिक्रिया
अभिनेता संजय मिश्रा ने राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि पुरस्कार की खबर सुनते ही उन्हें अपने पिता की याद आ गई, जो कभी प्रेस सूचना ब्यूरो में कार्यरत थे। वहीं कोरियोग्राफर विजय गांगुली ने बताया कि उनके पिता को भी 1974 और 1975 में राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके थे। उन्होंने कहा कि बचपन से वह मजाक में कहते थे कि परिवार में तीसरा राष्ट्रीय पुरस्कार वही लेकर आएंगे और अब उनका यह सपना सच हो गया।
भारतीय सिनेमा की विविधता को मिला सम्मान
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारतीय सिनेमा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव, राष्ट्र निर्माण, प्रेरणा और वास्तविक जीवन के संघर्षों को भी प्रभावी ढंग से पर्दे पर प्रस्तुत कर रहा है। इस वर्ष सम्मानित फिल्मों में देशभक्ति, इतिहास, खेल, सामाजिक संघर्ष और प्रेरणादायक जीवन कथाओं का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसने दर्शकों और समीक्षकों दोनों का विश्वास जीता।

Editorial Team
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