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भारत की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता

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स्रोत: पी. आई. बी.




भारत ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करना और ग्रीन हाइड्रोजन (GH2) इकोसिस्टम के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना है।



परिचय: ग्रीन हाइड्रोजन उस हाइड्रोजन को कहा जाता है, जो इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से तैयार की जाती है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर, पवन या जल विद्युत का उपयोग करके जल अणुओं (H₂O) को हाइड्रोजन (H₂) और ऑक्सीजन (O₂) में विभाजित किया जाता है।

इसे बायोमास गैसीफिकेशन की प्रक्रिया से भी तैयार किया जा सकता है, जिसमें बायोमास को हाइड्रोजन-समृद्ध गैस में परिवर्तित किया जाता है।


उत्सर्जन मानक: भारत हाइड्रोजन को "ग्रीन" श्रेणी में वर्गीकृत करता है, यदि इसकी उत्पादन प्रक्रिया से कुल उत्सर्जन उत्पादित 1 किलोग्राम हाइड्रोजन पर 2 किलोग्राम CO₂ समतुल्य से अधिक न हो।
हाइड्रोजन के अन्य प्रकार





प्रमुख अनुप्रयोग:

इस्पात उद्योग नवाचार: कार्बन उत्सर्जन को कम करने और स्थिरता को बढ़ाने हेतु लौह न्यूनीकरण और अन्य इस्पात निर्माण प्रक्रियाओं में कार्बन आधारित ईंधन के लिये इस्पात उद्योग में हरित हाइड्रोजन की खोज की जा रही है।

वर्तमान में इसकी व्यवहार्यता और इस्पात उत्पादन में एकीकरण का परीक्षण करने के लिये पाँच पायलट परियोजनाएँ चल रही हैं।


सड़क परिवहन: NGHM ने 10 मार्गों पर 37 हाइड्रोजन-संचालित वाहनों (बसों और ट्रकों) से संबंधित पाँच प्रमुख पायलट परियोजनाएँ शुरू की हैं, जिन्हें 208 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त है।
शिपिंग और समुद्री परिचालन: वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह (₹25 करोड़) और दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण, कांडला में मेगावाट पैमाने पर हरित हाइड्रोजन सुविधा विकसित की जा रही है, ताकि स्वच्छ समुद्री परिचालन को समर्थन दिया जा सके।







उच्च ऊँचाई गतिशीलता: नवंबर 2024 में, NTPC ने लेह (3,650 मीटर) में विश्व की सबसे अधिक ऊँचाई वाली ग्रीन हाइड्रोजन गतिशीलता परियोजना शुरू की, जिसमें 5 हाइड्रोजन बसें और एक ईंधन स्टेशन शामिल हैं।



NGHM: NGHM का लक्ष्य भारत को स्वच्छ हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाना, औद्योगिक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को मज़बूत करना, जीवाश्म ईंधनों के आयात पर निर्भरता घटाना और स्थायित्व व आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
लक्ष्य:

वर्ष 2030 तक, मिशन का लक्ष्य हरित हाइड्रोजन (ग्रीन हाइड्रोजन) उत्पादन के लिये 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना और प्रतिवर्ष 50 MMT ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है।
मिशन का लक्ष्य 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश के अवसर प्रदान करना, 6 लाख नौकरियाँ उत्पन्न करना, जीवाश्म ईंधन के आयात को प्रत्येक 1 लाख करोड़ रुपये तक कम करना है तथा इसके अतिरिक्त, मिशन के तहत अब तक 5,600 से अधिक प्रशिक्षुओं को हाइड्रोजन से संबंधित योग्यता के लिये प्रमाणित किया जा चुका है।







वित्त पोषण: इस मिशन के लिये शुरुआती बजटीय प्रावधान 19,744 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2029–30 तक) रखा गया है, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांज़िशन (SIGHT) कार्यक्रम सहित इसके प्रमुख घटकों के लिये धन आवंटन शामिल है।
वैश्विक साझेदारियाँ:

यूरोपीय संघ-भारत सहयोग: यूरोपीय संघ-भारत व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद के अंतर्गत अपशिष्ट से हाइड्रोजन उत्पादन पर 30 से अधिक संयुक्त प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
भारत-यूके साझेदारी: फरवरी 2025 में, भारत और यूके ने एक समर्पित मानक साझेदारी कार्यशाला के माध्यम से हाइड्रोजन मानकीकरण पर अपने सहयोग को मज़बूत किया।
H 2 ग्लोबल के साथ साझेदारी: नवंबर 2024 में, भारत के सौर ऊर्जा निगम (SECI) ने भारतीय हरित हाइड्रोजन के निर्यात के लिये बाज़ार-आधारित तंत्र की सुविधा के लिये H 2 ग्लोबल स्टिफ्टंग (जर्मनी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये।
सिंगापुर सहयोग: अक्तूबर 2025 में, सेम्बकॉर्प इंडस्ट्रीज ने उत्पादन, भंडारण और निर्यात के लिये एकीकृत हरित हाइड्रोजन और अमोनिया हब विकसित करने के लिये वी.ओ चिदंबरनार और पारादीप पोर्ट प्राधिकरणों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये।








SIGHT योजना: SIGHT योजना ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में उपयोग होने वाले इलेक्ट्रोलाइज़रों के विनिर्माण के लिये वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य सतत् ऊर्जा की ओर संक्रमण को तीव्र करना है।
ग्रीन हाइड्रोजन हब का विकास: अक्तूबर 2025 में, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने तीन प्रमुख बंदरगाहों को मान्यता दी;

दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (गुजरात), वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण (तमिलनाडु) और पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण (ओडिशा) को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में स्थापित किया गया है, जो उत्पादन, उपभोग एवं निर्यात के लिये एकीकृत केंद्र के रूप में कार्य करेंगे।


ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (GHCI): अप्रैल 2025 में शुरू की गई GHCI, हाइड्रोजन को ‘ग्रीन’ के रूप में प्रमाणित करने के लिये एक ढाँचा प्रदान करती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा से हो और उत्सर्जन मानकों को पूरा करता हो।

इसका उद्देश्य हाइड्रोजन उत्पादन में पारदर्शिता, अनुरेखण क्षमता (ट्रेसेबिलिटी) और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।


अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा प्रमाणन आवश्यकताएँ: GHCI के तहत, कोई भी ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई जो सरकारी सब्सिडी प्राप्त करती है या घरेलू बाज़ार में हाइड्रोजन बेचती है, उसे फाइनल सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) मान्यता और प्रमाणन प्रक्रियाओं की निगरानी करेगा।


स्ट्रैटेजिक हाइड्रोजन इनोवेशन पार्टनरशिप (SHIP): SHIP का उद्देश्य सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है, ताकि प्रतिस्पर्द्धी हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों का विकास किया जा सके।

इसमें एक समर्पित अनुसंधान एवं विकास फंड शामिल है और नवोन्मेष को बढ़ावा देने तथा घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने के लिये समूह-आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाता है।







ग्रीन हाइड्रोजन भारत के भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा परिदृश्य के लिये महत्त्वपूर्ण है, जो कम कार्बन उत्सर्जन वाली, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को गति प्रदान करता है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन घरेलू उत्पादन, नवाचार और वैश्विक बाज़ार पहुँच में तेज़ी लाएगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करेगा और भारत को एक स्थायी एवं सुरक्षित भविष्य की ओर वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिये तैयार करेगा।






दृष्टि मेन्स प्रश्न:


प्रश्न. वर्ष 2070 तक भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में ग्रीन हाइड्रोजन की क्षमता का आकलन कीजिये। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) इस परिवर्तन में महत्त्वपूर्ण भूमिका कैसे निभा सकता है?














ग्रीन हाइड्रोजन (GH2) क्या है? ग्रीन हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जो सौर या पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है, जिसमें जल को हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। यह बायोमास से भी बनाया जा सकता है, बशर्ते उत्सर्जन भारत द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से कम हो।
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन के प्रमुख उपयोग क्या हैं? ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग इस्पात उद्योग में आयरन रिडक्शन के लिये, सड़क परिवहन में हाइड्रोजन-चालित वाहनों के लिये, शिपिंग एवं समुद्री संचालन में तथा पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च-ऊँचाई गतिशीलता परियोजनाओं में किया जा रहा है, जैसे लेह में हाइड्रोजन-चालित बसें।
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के लक्ष्य क्या हैं? NGHM का लक्ष्य वर्ष 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिये 125 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ना, प्रतिवर्ष 50 MMT ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना, ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित करना और 6 लाख रोज़गार सृजित करना है।


भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिये कौन-सी पहलें की हैं?प्रमुख पहलों में इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण के लिये SIGHT योजना, प्रमुख बंदरगाहों पर ग्रीन हाइड्रोजन हब का विकास, ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (GHCI) और अनुसंधान एवं विकास सहयोग के लिये स्ट्रैटेजिक हाइड्रोजन इनोवेशन पार्टनरशिप (SHIP) शामिल हैं।


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