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बीएनएस कानून के तहत MP में पहली बार फांसी की सजा, ‘जादू-टोना’ के शक में सिर काटकर की थी हत्या

cy520520 2025-10-13 01:37:24 views 1272
  

बीएनएस के तहत एमपी में पहली बार सुनाई गई फांसी की सजा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एक जुलाई 2014 से लागू भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रविधानों के तहत मध्य प्रदेश में पहली बार फांसी की सजा सुनाई गई है। खंडवा के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने 23 वर्षीय चंपालाल उर्फ नंदू मेहर को हत्या का दोषी पाया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जानकारी के अनुसार, ग्राम छनेरा निवासी 60 वर्षीय रामनाथ बिलोटिया 12 दिसंबर 2024 की रात लघुशंका के लिए घर से निकला, तो पड़ोसी चंपालाल ने जादू-टोने के शक में विवाद करते हुए कुल्हाड़ी से सिर धड़ से अलग कर दिया। इस हत्याकांड को रामनाथ की पत्नी शांतिबाई ने अपनी आंखों से देखा। हत्या के बाद भी चंपालाल शव के पास खड़ा होकर लोगों को धमकाता रहा।
घटना के नौ माह बाद आया फैसला

बोरगांव पुलिस ने शांतिबाई की शिकायत पर बीएनएस की धारा 103(1) के तहत प्रकरण दर्ज किया। उप निरीक्षक रामप्रकाश यादव को जांच सौंपी गई। उन्होंने घटनास्थल पर आरोपित के हाथ से खून से सनी कुल्हाड़ी, कपड़े, मृतक का सिर और धड़ अलग-अलग बरामद किए। डीएनए रिपोर्ट में आरोपी के कपड़ों और कुल्हाड़ी पर मृतक के रक्त के चिन्ह पाए गए। यही साक्ष्य न्यायालय में सबसे महत्वपूर्ण साबित हुए। घटना के लगभग नौ माह बाद अब चंपालाल को फांसी की सजा सुनाई गई।

यह भी पढ़ें: \“ऐसे व्यक्ति का समाज में रहना खतरनाक\“, रेप के बाद मासूम की कर दी थी हत्या; अब दोषी को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
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