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दिल्ली में रोड एक्सीडेंट्स में 2.5 प्रतिशत की आई कमी, 143 ब्लैक स्पॉट पर सुधार से सेफ हुआ सफर

Chikheang 2025-10-14 23:37:37 views 1113
  

प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में होने वाले सड़क हादसे ट्रैफिक पुलिस के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। हर साल हजारों की संख्या में लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। ऐसा नहीं है कि ट्रैफिक पुलिस इस समस्या को लेकर चिंतित नहीं है। यही वजह है कि इस वर्ष करीब 143 ब्लैक स्पाट की पहचान कर उसे ठीक किया गया, जिसका नतीजा रहा कि इस वर्ष सितंबर तक सड़क हादसे में 2.5 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
हादसों के आंकड़ों में आई कमी

वैश्विक स्तर पर प्रमाणित और साक्ष्य-आधारित सड़क सुरक्षा उपायों को लागू करने के कारण यह कमी संभव हुई है। घातक सड़क दुर्घटनाओं में भी इस वर्ष 2.9 प्रतिशत की स्थिर गिरावट आई है। सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतें जो बीते वर्ष 1,178 थीं, इस वर्ष घटकर 1,149 रह गईं, जबकि घातक दुर्घटनाएं 1,148 से घटकर 1,115 रह गईं।
इन बिंदुओं पर किया गया है काम

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दुर्घटना विश्लेषण, जोखिम वाले कारणों पर ध्यान केंद्रित करने और सड़क अवसंरचना में सुधार के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आई है और लोगों का जीवन सुरक्षित हुआ है।

ट्रैफिक पुलिस के स्पेशल कमिश्नर अजय चौधरी के मुताबिक, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का क्रैश रिसर्च सेल दुर्घटना मृत्यु दर का विश्लेषण करता है और उच्च जोखिम वाले स्थानों (ब्लैक स्पाॅट) की पहचान करता है। इन स्थानों पर रोड इंजीनियरिंग सेल जाकर सड़क सुरक्षा सुधारों की सिफारिश करता है।
सड़क मरम्मत कराया और साइन बोर्ड लगाया

इस वर्ष दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 143 ब्लैक स्पाॅट की पहचान कर वहां बेहतर सड़क डिजाइन, साइन बोर्ड लगाने और सड़क मरम्मत का सुझाव दिया है ताकि सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें सक्रिय रूप से आयोजित की जा रही हैं, जहां विभिन्न विभाग मिलकर आवश्यक सुधारों पर काम कर रहे हैं।
3,600 से अधिक कर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, सड़क हादसे में कमी लाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने विशेष रूप से, स्कूल, कालेज और अस्पताल के आसपास 30 से अधिक स्थानों पर स्पीड को नियंत्रित किया है। इसके लिए जैसे स्पीड ब्रेकर, राउंड अबाउट डिजाइन सुधार और पैदल यात्री क्रासिंग लगाने की सिफारिश की गई है। स्पीड पर नियंत्रण रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस के 3,600 से अधिक कर्मियों को नवीन तकनीकों पर विशेषज्ञों से विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है। दुर्घटना रिसर्च टीम को उच्च जोखिम वाले मार्गों और स्थानों को मैप करने के लिए भी प्रशिक्षण दिया गया है।
विशेषज्ञों की भी लगातार मदद ले रहे


“दिल्ली में होने वाले सड़क हादसों को लेकर ट्रैफिक विभाग लगातार काम कर रहा है। दिल्ली वालों को सड़क पर सुरक्षित रखने के लिए नई तकनीक के साथ-साथ विशेषज्ञों की भी लगातार मदद ले रहे हैं। यही कारण है कि सड़क हादसे को कम करने में ट्रैफिक पुलिस सफल हो रही है।“

-अजय चौधरी, स्पेशल कमिश्नर, ट्रैफिक पुलिस


यह भी पढ़ें- हेलमेट पहनने से 42 प्रतिशत मौत का खतरा होता है कम, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के स्पेशल कमिश्नर ने बताए बचाव के उपाय
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