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जालंधर में पटाखा मार्केट पर संकट, लाइसेंस विवाद पहुंचा हाईकोर्ट; अवैध निर्माण पर निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

deltin33 2025-10-15 00:08:27 views 1248
  

जालंधर में फायर वर्क्स एसोसिएशन द्वारा लाइसेंसों की संख्या बढ़ाने की याचिका पर अदालत 16 अक्टूबर को सुनवाई करेगी (फोटो: जागरण)



जागरण संवाददाता, जालंधर। फायर वर्कस एसोसिएशन की ओर से 20 से अधिक लाइसेंंस की मांग पर अदालत 16 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। एसोसिएशन ने वर्ष 2016 को लागू नियमों और 9 वर्ष बाद बदले हालातों का तर्क देकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अपील दायर की है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

न्यायालय ने सवाल किया क्या लाइसेंस की संख्या कम या अधिक करने में उनको हस्तक्षेप करना पड़ेगा। अभी उच्च न्यायालय में फैसला सुरक्षित है इसके बावजूद पठानकोट चौक के पास सर्कस ग्राउंड में पटाखा मार्केट में मंगलवार तक बीस से अधिक शैड का ढांचा खड़ा कर दिया गया है।

सोमवार को नगर निगम की टीम विवाद कारण बैरंग लौटी लेकिन लाइसेंस से अधिक शैड डालने की वजह से मार्केट नगर निगम के निशाने पर है। हालांकि सोमवार को निगम की बिल्डिंग ब्रांच की टीम ने कहा था कि मार्केट के लिए नक्शा (ले-आउट) तैयार नहीं किया गया और उनको अवैध निर्माण की शिकायत मिली थी।

गौरतलब है कि हर वर्ष त्योहारों पर बल्टर्न पार्क में पटाखा मार्केट लगती थी लेकिन अब इसे स्पोटर्स हब के लिए विकसित किया जा रहा है, यहां स्पोटर्स कांप्लेक्स तैयार हो रहा है। इसी वजह से इस बार पटाखा मार्केट के लिए जगह का चयन मुसीबत बना हुआ था।

इससे पहले लायलपुर खालसा स्कूूल नकोदर रोड, लम्मा पिंड के पास घास मंडी फिर बेअंत सिंह पार्क की बात चली लेकिन नए नियमों कारण इन सभी जगह का चयन नहीं हो सका। पठानकोट चौक के सर्कस को पुलिस की एनओसी मिली, यहां व्यापारियों ने निजी तौर पर मार्केट की व्यवस्था की है।

इस बार दो चुनौतियां पटाखा व्यापारियों के सामने है पहली निजी जगह पर पटाखा मार्केट का बंदोबस्त, दूसरा आपसी गुटबंदी को दूर करना और तीसरा 20 लाइसेंस की संख्या को बढ़ाने का प्रयास अन्यथा 20 लाइसेंस पर अधिक स्टाल लगाने होंगे।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय 16 अक्टूबर को फायर वर्कस एसोसिएशन की याचिका पर फैसला होना है। एसोसिएशन ने तर्क दिया है कि वर्ष 2017 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने फैसला किया था कि वर्ष 2016 में जारी लाइसेंस के 20 फीसदी लाइसेंस ही जारी किए जाए।

फायर वर्कस एसोसिएशन ने कहा इससे उनके कारोबार के अधिकार का मौलिक हनन हुआ है। 20 प्रतिशत की सीमा तब जनसंख्या के आधार पर तय की गई थी अब हालात बदल चुके है, जन संंख्या बढ़ चुकी है। हालांकि इस पर उच्च न्यायालय तर्क दे चुकी है कि क्या ये तय करना अदालत का काम है कि सीमा 20 प्रतिशत हो या 30 प्रतिशत हो। अब फैसला 16 अक्टूबर को आएगा।
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