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मेरठ के 107 परिवारों के लिए कानपुर देहात में क्यों करना पड़ा जमीन का इंतजाम ? हर परिवार को मिलेगी आधा एकड़ कृषि भूमि

deltin33 2025-10-16 23:07:18 views 816
  

मवाना तहसील के 107 बंगाली परिवारों का परिवारों का होना है पुनर्वास (प्रतीकात्मक फोटो)



जागरण संवाददाता, मेरठ। मवाना तहसील के गांव नंगला गोसाई में झील की जमीन में पिछले 40 वर्षों से मकान बनाकर रह रहे तथा वहीं पर खेती कर रहे 107 हिंदू बंगाली परिवारों को एनजीटी ने वहां से हटाकर जमीन खाली कराने का आदेश दिया था। जबकि कोर्ट ने इन परिवारों का पुनर्वास कराने का आदेश प्रदेश सरकार को दिया है। लंबे समय से इनके पुनर्वास के लिए जमीन की तलाश की जा रही थी। इन परिवारों की मांग है कि इन्हें आवास के साथ साथ कृषि भूमि भी उपलब्ध कराई जाए।
कानपुर देहात के दो गांवों में इनके लिए जमीन की व्यवस्था कर ली गई है। कानपुर देहात के डीएम ने पूरा ले आउट प्लान और जमीन के दस्तावेज अपनी रिपोर्ट के साथ शासन को भेज दी है। मेरठ जिला प्रशासन का कहना है कि शासन का आदेश मिलते ही इन परिवारों को उक्त स्थान पर भेज दिया जाएगा।
तहसील मवाना के गांव नंगला गोसाई में झील की जमीन में ये 107 हिंदू बंगाली परिवार रामगढ़ बंगाली बस्ती में रहते हैं। दावा है कि 40 वर्षों से वे यहां रहकर खेती कर रहे हैं। इनके आधार कार्ड और वोटर कार्ड बने हैं। बिजली कनेक्शन भी हैं। एनजीटी ने इस जमीन को खाली कराने का आदेश जिला प्रशासन को दिया है। लेकिन विरोध के चलते जमीन खाली नहीं हो सकी। इन परिवारों की अपील पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इनका पुनर्वास कराने का आदेश दिया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
कानपुर देहात के दो गांवों में 21.6675 हेक्टेयर भूमि की व्यवस्था

इनके पुनर्वास के लिए एक साल से अधिक समय से प्रयास हो रहा है। हाल ही में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने मेरठ और कानपुर के प्रशासनिक अधिकारियों को लखनऊ तलब किया था। कानपुर देहात के जिलाधिकारी कपिल सिंह ने शासन को इन परिवारों के पुनर्वास के लिए प्लान भेजा है। जिसके मुताबिक प्रत्येक परिवार को आधा एकड़ कृषि भूमि दी जाएगी।
रसूलाबाद तहसील के गांव भैसायां में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित भूमि 11.1375 हेक्टेयर में 55 परिवारों के लिए तथा गांव ताजपुर तरसौली में 10.530 हेक्टेयर भूमि में 52 परिवारों को कृषि आवंटन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। दोनो गांवों में कुल 21.6675 हेक्टेयर भूमि में इन सभी 107 परिवारों को भूमि आवंटन किया जाएगा।
खेती की जमीन मिले बिना यहां से नहीं जाएंगे
बिना खेती की जमीन मिले यहां से जाने से किया था इन्कार

कुछ समय पहले खरखौदा में प्रत्येक परिवार को 200 गज आवासीय भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन इन परिवारों ने बिना खेती की जमीन मिले यहां से जाने से इन्कार कर दिया था। बंगाली बस्ती के निवासी रमेन और रोहित कुमार ने बताया कि खेती ही हमारा रोजगार है। हमें रहने और खेती की जमीन मिलेगी तो हम कानपुर या दूसरे किसी जनपद में भी चले जाएंगे। बिना खेती की जमीन मिले यहां से नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि आधा एकड़ जमीन खेती के लिए पर्याप्त नहीं है।
जिलाधिकारी डा. वीके सिंह का कहना है कि शासन स्तर से इन परिवारों के पुनर्वास के लिए जमीन की व्यवस्था की जा रही है। कानपुर देहात डीएम के पत्र की प्रति हमें मिली है। शासन से आदेश मिलते ही इन परिवारों को यहां से कानपुर के लिए रवाना कर दिया जाएगा।
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