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उत्‍तराखंड के इस इलाके में महिलाएं अब पहन सकेंगी सोने के केवल तीन गहने, पीछे है ये वजह

Chikheang 2025-10-17 23:37:17 views 1266
  

कन्दाड़ गांव की महिलाएं केवल सोने की तीन चीज ही कर सकती हैं धारण। प्रतीकात्‍मक



संवाद सूत्र जागरण चकराता, साहिया। शुक्रवार को चकराता तहसील के कन्दाड गांव के निवासियों ने सामूहिक बैठक में सर्वसहमति निर्णय लिया कि गांव की महिलाएं शादी विवाह, तीज त्यौहार या मंगल कार्य में सोने के ज्यादा 8 आभूषण नहीं पहनेंगी। उन्हें मात्र तीन ही आभूषण पहनने की अनुमति दी गयी है। इस फरमान को सर्वसहमति से स्वीकार भी किया जाएगा और इसके उल्लंघन करने वाले परिवार के खिलाफ 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जहां इस प्रकार के सामूहिक निर्णय लेने पर आसपास के ग्रामीणों ने भी सराहना की, वहीं कुछ इस निर्णय को समाज सुधार के लिए एक अच्छी पहल कह रहे हैं। कन्दाड़ गांव के निवासियों ने एक सामूहिक बैठक कर निर्णय लिया है कि वर्तमान समय में जो महिलाएं सोने के ज्यादा आभूषण पहन करके विभिन्न कार्यक्रम में सम्मिलित होती है, यह उचित नहीं है। इससे जो गांव में आर्थिक रूप से कमजोर महिला है, उसको देखा देखी लाखों रुपए का कर्ज लेकर उधार में सोने के आभूषण लेने को मजबूर होना पड़ता है।

अक्सर शादी विवाह में पैसे उधार लेकर आभूषण खरीदने पड़ते हैं, जबकि गांव के धनवान और संपन्न परिवार की महिलाएं लाखों करोड़ों रुपए के सोने के आभूषण पहनकर गांव में आती हैं तो कमजोर वर्ग के मन को ठेस पहुंचती है। ऐसे में उन्होंने गांव की एकता और सबको बराबरी के भाव से देखते हुए सर्वसहमति से पंचायत में यह फैसला जारी किया। जिसमें गांव की महिलाएं सोने के आभूषण के रूप में केवल तीन आभूषण कान के बुन्दे, गले का मंगलसूत्र और नाक की फूली पहन सकती हैं। यदि कोई इस निर्णय का उल्लंघन करेगा तो उस पर गांव वाले सामूहिक रूप से पचास हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाएंगे।

गांव के सभी लोगों को इस निर्णय को स्वीकार करना होगा। कन्दाड़ गांव द्वारा लिए गए इस निर्णय को जौनसार बावर के कई लोग अच्छी पहल बता रहे हैं। रंगकर्मी डॉ नंदलाल भारती, लेखक टीकाराम शाह, ब्लॉक प्रमुख चकराता आशा वर्मा, डॉ लीला चौहान आदि ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि वर्तमान समय में सोने की कीमतें आकाश छू रही हैं।

सोने और आभूषण की निरंतर बढ़ती कीमत और समाज में फैली दिखावे की प्रवृत्ति ने विशेषकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को एक असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। लोग केवल सामाजिक प्रतिस्पर्धा और देखा-देखी के कारण कर्ज़ के बोझ तले दबने को विवश हो रहे हैं। कन्दाड़ गांव की बैठक में सरण सिंह, टीकम सिंह, तिलक सिंह, गजेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह, रणवीर, अमित, शूरवीर सिंह, अनिल सिंह, जीत सिंह, भगत सिंह रावत, दौलत सिंह नरेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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