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दिल्ली में ग्रेप-2 के नियमों की उड़ रही धज्जियां, लाखों लोगों की जान पर मंडरा रहा खतरा

LHC0088 2025-10-28 19:34:49 views 1247
  



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में सख्ती के दावों के बावजूद ग्रेप-टू के प्रविधानों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। राजधानी के कई इलाकों मयूर विहार, कश्मीरी गेट, मंडी हाउस, अक्षरधाम, वजीरपुर, पंजाबी बाग, मयूर विहार, ओखला, करोल बाग, शाहदरा और द्वारका आदि क्षेत्रों में अब भी धूल उड़ रही है, खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

वहीं, स्मॉग के कारण सुबह-शाम टहलने वालों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कामकाजी युवतियों को मास्क लगाकर निकलना पड़ रहा है। निर्माण स्थलों पर सड़क किनारे छिड़काव नहीं हो रहा, कई जगहों पर डीजल जनरेटर लगातार चल रहे हैं।

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप-टू) के तहत निर्माण और ध्वंस कार्यों पर नियंत्रण, डीजल जेनरेटर पर रोक और पानी के नियमित छिड़काव के स्पष्ट आदेश हैं, कार्रवाई के दावे भी हैं पर, ज़मीनी हकीकत इससे उलट है।

बताया गया कि अधिकांश निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपकरण बंद पड़े हैं, सड़क किनारे गड्ढों में मिट्टी का जमाव और हवा में उड़ान लगातार जारी है। वहीं, बिजली कटौती के दौरान दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में निजी भवनों, दुकानों और कारखानों में जनरेटर चलने की शिकायतें भी दर्ज हुईं, जिससे प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है।

शिकायतों पर हुई कार्रवाई इसकी पुष्टि करती है। इस कारण राष्ट्रीय राजधानी में एक्यूआइ का स्तर अब भी गंभीर बना हुआ है, जिससे महिलाओं, बुजुर्ग और बच्चों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और नगर निकायों ने ग्रेप-2 लागू होने के बाद कार्रवाई को लेकर शुरुआती त्वरित कदम उठाए हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह सीमित है।

पिछले 48 घंटों में कुल 235 निर्माण स्थलों का निरीक्षण ही किया गया, जिनमें से 57 पर काम पूरी तरह बंद कराया गया। इसी तरह, 145 मामलों में कूड़ा जलाने की शिकायतों पर जुर्माना लगाया गया। कुल जुर्माने की राशि अभी स्पष्ट नहीं है पर, बताया जा रहा है कि औसतन प्रति उल्लंघन पांच से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा हैं।

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दिल्ली में छोटे-मोटे निर्माण कार्यों से इतर एक हजार से अधिक निर्माण साइट हैं पर, निरीक्षण मात्र 235 का ही हो सका। विद्युत कटौती के दौरान कई क्षेत्रों में जनरेटर अब भी चल रहे हैं। ऐसे निर्माण अब भी जारी हैं, जिनसे धूल उड़ती है, ऐसे अधिकांश स्थानों पर पानी का छिड़काव नहीं होने की शिकायतें हैं। जो ग्रेप-2 के प्रतिबंधों की निगरानी में लापरवाही को उजागर करता है। कई सड़कों पर वाटर स्प्रिंकलर मशीनों को नहीं उतारा गया है। इसकी वजह से वहां धूल उड़ रही है। कई जगहों पर निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव नहीं देखने को मिला। खुले में निर्माण सामग्री भी जगह-जगह पड़ी है।
क्या हैं ग्रेप-2 के प्रविधान

  • डीजल जनरेटर पर पूर्ण प्रतिबंध: आपात सेवाओं को छोड़कर सभी डीजल सेट बंद।
  • निर्माण और विध्वंस कार्य के दौरान धूल उड़ने से रोकने के इंतजाम।
  • सड़क सफाई और पानी छिड़काव: हाइ-ट्रैफिक रोड्स पर रोजाना मैकेनिकल स्वीपिंग, वैक्यूम क्लीनिंग, और एंटी-स्माग गन से छिड़काव। हाटस्पाट्स पर फोकस।
  • सार्वजनिक परिवहन बढ़ावा: डीटीसी बसें और मेट्रो की फ्रीक्वेंसी बढ़ाना, पार्किंग शुल्क दोगुना।
  • कूड़ा जलाने पर सख्ती: खुले में कचरा या बायोमास जलाने पर जुर्माना (5,000-20,000 रुपये प्रति मामला)।
  • अन्य: ट्रैफिक मैनेजमेंट, औद्योगिक इकाइयों का ‘इंडस्ट्रील इमिशन चेक’ और जन जागरूकता।
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