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जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पशु तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई में लापरवाही के आरोप में घिरने के बाद कुशीनगर जिले से हटाए गए 33 पुलिसकर्मियों में 27 का तबादला हाईकोर्ट ने रद कर दिया है।
राहत मिलने के बाद 11 पुलिसकर्मियों ने लाइन में आमद करा ली है। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में इन्हें ज्वाइन कराया गया है, जबकि शेष प्रकरणों में विभागीय जांच जारी है।
15 सितंबर की रात पिपराइच के महुआचाफी गांव में नीट की तैयारी कर रहे छात्र दीपक गुप्ता का पशु तस्करों ने अपहरण के बाद हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद पुलिस महकमे में बड़ी कार्रवाई हुई थी। गोरखपुर में निलंबन और कुशीनगर में एक साथ 33 पुलिसकर्मियों को हटाकर लाइन हाजिर किया गया था।
इनमें दो निरीक्षक, कई उपनिरीक्षक, चौकी प्रभारी, मुख्य आरक्षी और आरक्षी शामिल थे। बाद में अधिकांश का दूसरे जिलों में तबादला कर दिया गया था। इस कार्रवाई के विरुद्ध 27 पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की थी।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि जिन गलत गतिविधियों और क्रियाकलापों का हवाला देकर तबादले किए गए, उनके समर्थन में कोई ठोस और स्पष्ट आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। इसी आधार पर 27 पुलिसकर्मियों के तबादले को रद कर दिया गया।
कोर्ट के आदेश के बाद उपनिरीक्षक अरविंद कुमार, गौरव कुमार शुक्ल और पवन कुमार सिंह के अलावा मुख्य आरक्षी दिलीप कुमार, रामानंद सिंह यादव, श्याम सिंह यादव तथा आरक्षी सूरज गिरी, दिव्यमान यादव, बृजेश यादव और विनोद कुमार गुप्ता शामिल हैं।
एडीजी की जांच रिपोर्ट पर हुई थी कार्रवाई
घटना के बाद एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश गोरखपुर पहुंचे थे। पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने के साथ ही पशु तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने के निर्देश दिए थे। 17 सितंबर को एडीजी जोन मुथा अशोक जैन मामले की जांच में कुशीनगर पहुंचे जिसके बाद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में संबंधित पुलिसकर्मियों को ज्वाइन कराया गया है। पशु तस्करों से सांठगांठ के आरोपों की जांच अभी चल रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- केशव कुमार, एसपी कुशीनगर |
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