पीटीआर में लगाई गई फेंसिंंग
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पांच रेंज, 245 किलोमीटर की परिधि और 73,000 वर्ग हेक्टेयर में घोड़े की नाल के आकार में बसे पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का प्राकृतवास ऐसा है कि यहां सबसे तेजी से बाघों की संख्या बढ़ रही है। जंगल में अच्छी संख्या में वन्यजीवों के शिकार के लिए हिरण, जंगली सुअर, नीलगाय व अन्य वन्यजीवों की उपलब्धता के साथ ही नहरों से पानी भी सहज मिल जाता है।
बाघों के लिए मुफीद माने जाने वाले इस टाइगर रिजर्व में चेन फेंसिंग कार्य भी कम ही कराया गया। पीटीआर की बराही, माला और महोफ रेंज के 66.92 किलोमीटर क्षेत्र में चेन फेंसिंग की गई, जिस पर करीब 19.66 करोड़ रुपये खर्च किया गया। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की स्थापना नौ जून 2014 को की गई थी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास के क्षेत्रों में टाइगर तथा अन्य वन्यजीवों के हमले में 15 व्यक्तियों की मृत्यु होने की वजह से मानवीय गतिविधियां नकारात्मक रूप से प्रभावित हुईं। मानव वन्यजीवों के संघर्ष को रोकने के लिए पीटीआर प्रशासन ने सीमावर्ती 72 ग्रामों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गये।
वन्यजीवों के वन क्षेत्र से बाहर आने से रोकने और मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने के कारण वर्ष 2016-17 से 2019-20 तक कुल 51 किलोमीटर क्षेत्र में सोलर तार फेसिंग करायी गई, जो बहुत कारगर साबित नहीं हुई। इसके बाद टाइगर कंजर्वेशन प्लान के अंतर्गत वर्ष 2020-21 से मानव वन्यजीव संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में चेनलिंक फेसिंग का कार्य प्रारंभ कराया गया।
इसमें बराही रेंज में आठ किलोमीटर, महोफ रेंज में 24.5 किलोमीटर, माला में 32 किलोमीटर और बराही रेंज में 10.5 किलोमीटर के करीब चेन फेंसिंग कराई गई। इसमें कुल मिलाकर करीब 19.66 करोड़ रुपये की लागत आई, जिसको आपदा राहत कोष और कैंपा योजना के अंतर्गत काम कराया गया।
इसमें वित्त वर्ष 20220- 21 में 13.05 किलोमीटर 2.23 करोड़ रुपये से, वित्त वर्ष 2022-23 में 3.87 किलोमीटर 1.12 करोड़ रुपये से , वित्त वर्ष 2023-24 में 25 किलोमीटर 7.76 करोड़ रुपये की लागत से और वित्त वर्ष 2024-25 में 25 किलोमीटर चेन फेंसिंग कार्य 8.55 करोड़ रुपये की लागत से कराया।
वहीं, पीटीआर के दो रेंज हरीपुर और दियोरिया में काम नहीं कराया गया। अभी पीटीआर का सेंसटिव माला और महोफ क्षेत्र का बांस खेड़ा का क्षेत्र बचा है। इसका प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं हुई। डीएफओ पीटीआर मनीष सिंह बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश व निर्देश के अनुक्रम में ही बाघ संरक्षण कार्य किया जा रहा है।
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