राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में उपभोक्ताओं के परिसर में लगे स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के साथ लगाए गए चेक मीटर के आंकड़ों का मिलान नहीं किया जा रहा है। पावर कारपोरेशन ने अब तक एक भी रिपोर्ट ऊर्जा मंत्रालय को नहीं भेजा है। इसकी वजह से स्मार्ट मीटरों को लेकर आ रही शिकायतों के बारे में सही जानकारी नहीं हो पा रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सवाल किया है कि चेक मीटरों का मिलान रिपोर्ट क्यों नहीं जारी किया जा रहा है। उपभोक्ता इन मीटरों पर विश्वास कैसे करें। यह उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
प्रदेश में अब तक लगभग 56.82 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। जिसमें से उपभोक्ताओं की सहमति लिए बगैर लगभग 37.43 स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में बदला जा चुका है। स्मार्ट मीटरों पर आ रही रीडिंग के मिलान के लिए राज्य में 3,76,596 चेक मीटर लगा दिए गए हैं।
भारत सरकार के आदेशों के अनुसार प्रत्येक माह उपभोक्ताओं के यहां लगे पुराने मीटर (चेक मीटर) की रीडिंग और स्मार्ट प्रीपेड मीटर की रीडिंग का मिलान कर उसकी रिपोर्ट मंत्रालय को भेजने हैं। पावर कारपोरेशन ने अब तक इससे संबंधित कोई रिपोर्ट मंत्रालय को नहीं भेजा है।
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि यह गंभीर मामला है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत उपभोक्ताओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चेक मीटर लगाना अनिवार्य किया गया है। प्रदेश भर से उपभोक्ताओं की शिकायतें आ रही हैं कि स्मार्ट मीटर तेज चल रहे हैं, बैलेंस अचानक शून्य या माइनस हो जाता है। शिकायतों की सच्चाई जानने के लिए बिजली कंपनियां चेक मीटर और स्मार्ट मीटर की तुलनात्मक रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर जारी करें, जिससे उपभोक्ताओं का भ्रम दूर हो सके।
विद्युत वितरण निगमों में स्थापित चेक मीटरों की संख्या
- चेक मीटर की संख्या-विद्युत वितरण निगम
- 1,33,614-पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम
- 78,205-मध्यांचल विद्युत वितरण निगम
- 1,15,854-दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम
- 3,027-केस्को, कानपुर
- 45,896-पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम
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