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क्‍या सही तरीके से धूप सेंकते हैं आप? चिक‍ित्‍सकों ने बताया तरीका; व‍िटाम‍िन D की कमी पर चौंकानेवाली रिपोर्ट

LHC0088 2 hour(s) ago views 734
  

धूप सेंकना है फायदेमंद।



जागरण संवाददाता, पटना। बदलती जीवनशैली, खानपान और छोटे बंद फ्लैट के कारण राजधानीवासी धीरे-धीरे शहरी को कमजोर करने वाली विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं।

2023 के एक सर्वे में पटना जिले के 82 प्रतिशत लोगों में विटामिन डी की कमी पाई गई थी, जबकि एनएफएचएस-5 के अनुसार देश की 73 प्रतिशत आबादी इससे प्रभावित है।

शहरी जीवनशैली, ऊंची इमारतें, खुले मैदानों की कमी और सर्दियों में शरीर के पूरी तरह ढके रहने से यह समस्या और बढ़ी है। करीब 24 दिन बाद रविवार से शरीर को सेंकने वाली धूप निकली है।

सही खानपान व सही तरीके से 20 मिनट ली गई धूप अधिसंख्य मामलों में बिना पूरक दवा के विटामिन डी की कमी दूर कर सकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर डाक्टर के परामर्श पर ही विटामिन डी की दवा लेनी चाहिए।  
सनस्क्रीन-कांच के पीछे से धूप का नहीं कोई फायदा

आइजीआईएमएस (IGIMS) में मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. मनोज कुमार चौधरी के अनुसार धूप से विटामिन डी लेने के सही तरीके की जानकारी नहीं होने के कारण यह समस्या है।

विटामिन डी के लिए सिर्फ धूप में बैठना नहीं बल्कि इसका त्वचा तक पहुंचना जरूरी है। सर्दियों में लोग पूरे शरीर को कपड़ों से ढंग लेते हैं जिससे धूप में रहने के बावजूद विटामिन डी नहीं मिल पाती है।

जरूरी है कि शरीर का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा, बेहतर होगा कि हाथ (कम से कम कोहनी तक), पैर (कम से कम घुटनों तक), चेहरा व गर्दन पर सीधी धूप पड़े।

सिर्फ चेहरे पर धूप पड़ने से पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिल पाता। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच की धूप अल्ट्रावायलेट-बी किरणें त्वचा से मिल विटामिन डी बनाने में सक्षम होती हैं।

गेहुंआ रंग है तो 15 से 20 मिनट और सांवले हैं तो 20 से 30 मिनट सीधी धूप लेना जरूरी है। खिड़की, शीशा या कार के अंदर बैठकर धूप लेने से फायदा नहीं होता क्योंकि यूवी-बी किरणें कांच से होकर त्वचा तक नहीं पहुंच पाती हैं। धूप लेते समय शरीर में सनस्क्रीन नहीं लगाएं, ठंडी हवा चल रही हो तो धूप लेने के साथ हल्का व्यायाम टहलते आदि रहें।  

  • धूप लेने के सही तरीके नहीं जानने से अधिसंख्य लोगों में हो रही विटामिन डी की कमी
  • 82 प्रतिशत राजधानीवासियों में विटामिन डी की कमी, बच्चे-महिलाएं अधिक प्रभावित
  • हड्डियों के साथ इम्युनिटी होती कमजोर, थकान-डिप्रेशन, बार-बार संक्रमण-वायरल जैसे रोग बढ़े
  • साइलेंट खतरा है विटामिन डी की कमी क्योंकि शुरुआत में नहीं दिखते लक्षण, जांच भी महंगी

सही खानपान से मिलता धूप का पूरा फायदा

  • कैल्शियम व विटामिन डी मिलकर हड्डियों को मजबूत बनाते हैं, इसलिए रोज दूध, दही या पनीर का सेवन करें।
  • अंडा की जर्दी विटामिन डी का अच्छा प्राकृतिक स्रोत है, सप्ताह में 3 से चार अंडे का सेवन लाभकारी है।
  • मछली व मछली के तेल में भरपूर विटामिन डी होता है, जो नहीं खाते वे डाक्टर की सलाह पर फिश आयल कैप्सूल ले सकते हैं।
  • बादाम, अखरोट, काजू, तिल, सूरजमुखी के बीज जैसे ड्राई फ्रूट्स-बीज कैल्शियम के अवशोषण में मदद करते हैं।
  • पालक, मेथी, ब्रोकली जैसी हरी सब्जियाें व धूप में सुखाएं मशरूम में विटामिन डी अधिक होता है।
  • संतरा, केला, सेब जैसे फल व सुबह धूप के बाद गुनगुना दूध या छाछ पीना लाभकारी।
  • धूप लेने के तुरंत बाद चाय-काॅफी नहीं पिएं, अत्यधिक जंक फूड और साफ्ट ड्रिंक से बचें।

यूं ही नहीं कहते साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी

  • हड्डियाें की कमजोरी- कमर, घुटनों व जोड़ों में दर्द, बच्चों में रिकेट्स, बुजुर्गों में आस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों का खोखलापन।
  • मांसपेशियों की कमजोरी- चलने-फिरने में परेशानी, बार-बार गिरना और हल्के झटके से फ्रैक्चर हो जाना।
  • इम्युनिटी घटती है- सर्दी-खांसी, वायरल संक्रमण बार-बार हो जाता है।
  • थकान-सुस्ती- काम करने की क्षमता में कमी, दिनभर ऊर्जा की कमी।
  • मानसिक प्रभाव- चिड़चिड़ापन, उदासी, डिप्रेशन, नींद की समस्या।
  • बच्चों का विकास प्रभावित- लंबाई-वजन बढ़ने में रुकावट, दांत कमजोर।
  • महिलाओं में समस्याएं- हार्मोनल असंतुलन, जोड़ों का दर्द।
  • दिल व शुगर का जोखिम- हाई बीपी, टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
  • त्वचा व बाल- बाल झड़ना, त्वचा का रूखापन, घाव देर से भरना।
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