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Pradosh Vrat 2026: अगर हाथ में नहीं टिकता पैसा, तो प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें इस स्तोत्र का पाठ

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Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व (Image Source: AI-Generated)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को अति प्रिय है। इस शुभ अवसर पर प्रदोष व्रत मनाया जाता है। प्रदोष व्रत के दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत को स्त्री और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं।

  

प्रदोष व्रत का फल दिन अनुसार प्राप्त होता है। माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत 16 जनवरी को मनाया जाएगा। शुक्रवार के दिन पड़ने के चलते यह शुक्र प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat Shiva Puja) कहलाएगा। शुक्र प्रदोष व्रत करने से मनचाही मुराद पूरी होती है। साथ ही आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है।

अगर आप भी आर्थिक तंगी को दूर करना चाहते हैं, तो शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भक्ति भाव से भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय इस स्तोत्र का पाठ (Remedies for Financial Stability) अवश्य करें।
दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र (Daridraya Dahana Shiva Stotram)


विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय ।
कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्‌र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥
गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय ।
गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय दारिद्‌र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥
भक्तप्रियाय भवरोगभयापहाय उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय ।
ज्योतिर्मयाय गुणनामसुकृत्यकाय दारिद्‌र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥
चर्मांबराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय ।
मंजीरपादयुगलाय जटाधराय दारिद्‌र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥
पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रय मण्डिताय ।
आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय दारिद्‌र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥
गौरीविलासभवनाय महेश्वराय पञ्चाननाय शरणागतकल्पकाय ।
शर्वाय सर्वजगतामधिपाय तस्मै दारिद्‌र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥
भानुप्रियाय भवसागरतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय ।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय दारिद्‌र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥
रामप्रियाय राघुनाथवरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय ।
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय दारिद्‌र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय ।
मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय दारिद्‌र्यदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥
वसिष्ठेनकृतं स्तोत्रं सर्व दारिद्‌र्यनाशनम् ।
सर्वसंपत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम् ॥
शिव आह्वान मंत्र

ॐ मृत्युंजय परेशान जगदाभयनाशन ।
तव ध्यानेन देवेश मृत्युप्राप्नोति जीवती ।।
वन्दे ईशान देवाय नमस्तस्मै पिनाकिने ।
नमस्तस्मै भगवते कैलासाचल वासिने ।
आदिमध्यांत रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।।
त्र्यंबकाय नमस्तुभ्यं पंचस्याय नमोनमः ।
नमोब्रह्मेन्द्र रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।।
नमो दोर्दण्डचापाय मम मृत्युम् विनाशय ।।
देवं मृत्युविनाशनं भयहरं साम्राज्य मुक्ति प्रदम् ।
नमोर्धेन्दु स्वरूपाय नमो दिग्वसनाय च ।
नमो भक्तार्ति हन्त्रे च मम मृत्युं विनाशय ।।
अज्ञानान्धकनाशनं शुभकरं विध्यासु सौख्य प्रदम् ।
नाना भूतगणान्वितं दिवि पदैः देवैः सदा सेवितम् ।।
सर्व सर्वपति महेश्वर हरं मृत्युंजय भावये ।।

शिव बिल्वाष्टकम्


त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधं
त्रिजन्म पापसंहारम् ऐकबिल्वं शिवार्पणं
त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च अच्चिद्रैः कोमलैः शुभैः
तवपूजां करिष्यामि ऐकबिल्वं शिवार्पणं
कोटि कन्या महादानं तिलपर्वत कोटयः
काञ्चनं क्षीलदानेन ऐकबिल्वं शिवार्पणं
काशीक्षेत्र निवासं च कालभैरव दर्शनं
प्रयागे माधवं दृष्ट्वा ऐकबिल्वं शिवार्पणं
इन्दुवारे व्रतं स्थित्वा निराहारो महेश्वराः
नक्तं हौष्यामि देवेश ऐकबिल्वं शिवार्पणं
रामलिङ्ग प्रतिष्ठा च वैवाहिक कृतं तधा
तटाकानिच सन्धानम् ऐकबिल्वं शिवार्पणं
अखण्ड बिल्वपत्रं च आयुतं शिवपूजनं
कृतं नाम सहस्रेण ऐकबिल्वं शिवार्पणं
उमया सहदेवेश नन्दि वाहनमेव च
भस्मलेपन सर्वाङ्गम् ऐकबिल्वं शिवार्पणं
सालग्रामेषु विप्राणां तटाकं दशकूपयो:
यज्नकोटि सहस्रस्च ऐकबिल्वं शिवार्पणं
दन्ति कॊटि सहस्रॆषु अश्वमॆध शतक्रतौ
कोटिकन्या महादानम् ऐकबिल्वं शिवार्पणं
बिल्वाणां दर्शनं पुण्यं स्पर्शनं पापनाशनं
अघोर पापसंहारम् ऐकबिल्वं शिवार्पणं
सहस्रवेद पाटेषु ब्रह्मस्तापन मुच्यते
अनेकव्रत कोटीनाम् ऐकबिल्वं शिवार्पणं
अन्नदान सहस्रेषु सहस्रोप नयनं तधा
अनेक जन्मपापानि ऐकबिल्वं शिवार्पणं
बिल्वस्तोत्रमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ
शिवलोकमवाप्नॊति ऐकबिल्वं शिवार्पणं

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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