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UP वन निगम में 64 करोड़ का महाघोटाला, फर्जी अधिकारी बनकर खुलवाया खाता; 7 करोड़ डकारे

Chikheang 2 hour(s) ago views 399
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश वन निगम (यूपी फारेस्ट कारपोरेशन) के नाम पर फर्जी तरीके से बचत बैंक खाता खुलवाकर करोड़ों रुपये का फ्राड करने वाला दीपक संजीव सुवर्णा और अनीस उर्फ मनीष अभी फरार हैं।

सीबीआइ ने शनिवार को देर रात तक उनकी तलाश में गाजियाबाद, कानपुर और दिल्ली में छापेमारी की थी, इसके बावजूद दोनों हाथ नहीं आए हैं। इस फ्राड में वन विभाग के एक बाबू की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। सीबीआइ उससे भी पूछताछ की तैयारी में है।

सूत्रों के अनुसार दीपक सुवर्णा कोलकाता का रहने वाला है। उसके दिल्ली और गाजियाबाद में भी ठिकाने हैं। वहीं अनीस उर्फ मनीष कानपुर का रहने वाला है। बीते वर्ष 18 दिसंबर को अनीस उर्फ मनीष व दीपक संजीव सुवर्णा बैंक आफ इंडिया की सदर शाखा पहुंचे थे।

उन्होंने स्वयं को वन निगम का अधिकारी बताते हुए, जानकारी दी कि निगम फिक्स्ड डिपाजिट कराना चाह रहा है। इस कार्य के लिए दीपक को अधिकृत किया गया है।इसके बाद उन्होंने खाता खुलवाने के लिए वन निगम का जाली केवाईसी, पैन कार्ड, जीएसटी पंजीकरण प्रमाण पत्र लगाकर बचत खाता खुलवा लिया।

26 दिसंबर को दीपक ने बैंक पहुंचकर खाते की चेक बुक भी ले ली। इसी बीच एक जनवरी को वन निगम ने बैंक के खाते में 64.82 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा करा दी। निगम के प्रबंध निदेशक के नाम से एक साल का फिक्स डिपाजिट करने का ईमेल भी बैंक को मिला।

बताया जा रहा है कि दो जनवरी को दीपक बैंक पहुंचा और एक फर्जी पत्र देकर 6.82 करोड़ रुपये से अधिक की राशि काे फिक्स डिपाजिट करने और 58 करोड़ रुपये वन निगम के बचत खाते में ट्रांसफर के लिए कहा। उसने खाते के साथ जुड़े मोबाइल नंबर को भी बदलने के लिए आवेदन भी किया।

इसी पत्र में फिक्स डिपाजिट प्रमाण पत्र भी दीपक को देने के निर्देश दिए गए थे। बैंक ने उस विश्वास करते हुए सभी प्रक्रिया पूरी कर दी। इसके बाद दीपक ने दो से पांच जनवरी के बीच 6.95 करोड़ रुपये कोलकाता और दिल्ली के छह खातों में ट्रांसफर भी करा लिए।

वन निगम को जब इस मामले की जानकारी हुई तो 13 जनवरी को प्रबंधक निदेशक अरविंद कुमार सिंह ने बैंक की सदर शाखा के कर्मचारियों पर 64.82 करोड़ रुपये गबन करने का केस गाजीपुर थाने में दर्ज करा दिया।

इस मामले में बैंक के अधिकारियों ने जांच की तो अनीस उर्फ मनीष और दीपक संजीव सुवर्णा का नाम जांच में सामने आया, लेकिन दोनों वन निगम के कर्मचारी नहीं पाए गए। इसके बाद बैंक ने सीबीआइ में मामले की एफआइआर कराई है।
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