गांव खुड़नाखार में वीरवती के घर रोतीं महिलाएं
जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। शहर से लेकर गांवों तक बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। खूंखार बंदर आए दिन किसी न किसी पर हमलाकर देते हैं। शुक्रवार को शमसाबाद के गांव खुड़नाखार में बंदरों के हमले से बचने के लिए चने सुखा रही वृद्ध महिला छत से नीचे गली में आ गिरीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए वन विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन अधिकारियों को शासनादेश आने का इंतजार है।
शमसाबाद के गांव खुड़नाखार निवासी शेखर चंद्र की 75 वर्षीय पत्नी वीरवती गंगवार शनिवार को अपराह्न 3:00 बजे अपने घर की छत पर धूप में चने सुखा रही थीं। इसी दौरान बंदरों के एक झुंड ने उन पर हमला कर दिया। वीरवती जान बचाने के लिए पीछे की ओर भागीं। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने के कारण वह छत से नीचे गली में जा गिरीं। चीख-पुकार सुनकर पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे और उन्हें उठाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना से स्वजन में कोहराम मच गया। मृतका के एक पुत्री है जो इस समय नोएडा में रह रही है। पड़ोसियों ने उसे घटना की जानकारी दी। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बंदरों की संख्या अत्यधिक बढ़ गई है। वह आए दिन लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार गुहार लगाने के बावजूद इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पाया है।
जिला वन अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि बंदरों को पकड़ने संबंधी कोई भी शासनादेश नहीं आया है। आदेश आते ही प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
गत वर्ष बंदरों के हमले से हुई थी पांच लोगों की मौत
11 जनवरी 2025: शमसाबाद के मुहल्ला गढ़ी निवासी नजीब की 18 वर्षीय पुत्री हिवा छत पर थी। तभी बंदरों के दौड़ने पर बचने को भागी और जीने से गिरकर उसकी मौत हो गई थी।
13 जनवरी 2025: शहर के मुहल्ला महावीरगंज प्रथम निवासी समीर वर्मा की 36 वर्षीय पत्नी गुड़िया वर्मा छत पर थीं तभी बंदरों ने दौड़ा लिया। बचकर भागने के दौरान जीने पर पैर फिसलने से नीचे आ गिरी। इस दौरान सिर में चोट आने से उनकी मौत हो गई।
18 जनवरी 2025: मोहम्मदाबाद के गांव खिमसेपुर निवासी 45 वर्षीय नन्हें लाल वर्मा के घर से बंदर कपड़े उठा ले गया था। कपड़े छुड़ाने के दौरान बंदर उन पर दौड़ पड़े। बचकर भागने के दौरान पैर फिसलने से नन्हें लाल छत से नीचे गिर गए थे। घायल नन्हें लाल की 20 जनवरी को कानपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
22 फरवरी 2025: कायमगंज के गांव पितौरा निवासी साबिर अली की 60 वर्षीय पत्नी कुरैशा शाम को अपने घर की छत पर बैठीं थीं। तभी वहां बंदर आ गए। बंदरों के डर से वह जीने से नीचे जाने लगीं। हड़बड़ी में संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिरकर बेहोश हो गईं। अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
13 मार्च 2025: कायमगंज के मोहल्ला चिलांका निवासी कबाड़ कारोबारी दिव्यांग अकरम का छह वर्षीय पुत्र यामीन घर की छत पर खेल रहा था। तभी छत पर बंदर आने से यामीन पड़ोसी पप्पू की छत पर भागा। बिना मुंडेर की छत से वह नीचे गली में जा गिरा। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई ले जाने के दौरान रास्ते में यामीन की मौत हो गई।
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