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भारत में दो पहिया सवारों के लिए सबसे खतरनाक सड़क: हर घंटे 17 मौतें, साल में लाख हादसे... भयावह हैं आंकड़े

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भारत में बढ़ रहे सड़क हादसे तेज रफ्तार सबसे बड़ा कारण (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के द्वारका में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार के सपनों को हमेशा के लिए तोड़ दिया। साहिल नाम का युवक विदेश में पढ़ाई कर अपने परिवार का सहारा बनना चाहता था, लेकिन एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की टक्कर ने उसकी जिंदगी छीन ली।

हैरानी की बात यह है कि उसकी मौत के 11 दिन बाद उसे एमबीए के लिए एडमिशन लेटर मिला। यह घटना बताती है कि देश में सड़क हादसे अब भी एक बड़ी और गंभीर समस्या बने हुए हैं।

3 फरवरी की दोपहर साहिल दिल्ली के द्वारका सेक्टर-11 में बाइक से जा रहा था। उसके आगे एक बस थी। ओवरटेक करने की कोशिश में सामने से आ रही तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक तीन टुकड़ों में बंट गई और साहिल की मौके पर ही मौत हो गई।

साहिल की मां ईना माकन का कहना है कि उनका बेटा विदेश जाकर एमबीए करना चाहता था और परिवार को संभालना चाहता था। मां-बेटे दोनों ने मिलकर यह सपना देखा था। साहिल की मौत के 11 दिन बाद मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से पत्र आया, जिसमें लिखा था कि वह एमबीए कोर्स के लिए चयनित हो गया है। लेकिन उस खुशखबरी को पढ़ने के लिए साहिल अब इस दुनिया में नहीं था।
बढ़ते सड़क हादसे

यह कोई अकेली घटना नहीं है। भारत में सड़क हादसों का आंकड़ा लगातार चिंता बढ़ा रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार 2019 और 2020 में मौतों में थोड़ी कमी आई थी, लेकिन उसके बाद फिर बढ़ोतरी शुरू हो गई। 2022 में देश में सड़क दुर्घटनाओं में 11.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार द्वारा जारी 2023 के आंकड़ों में भी 4.2% की वृद्धि देखी गई।

सरकार के अनुसार, अगर किसी सड़क हादसे में एक या उससे अधिक लोगों की मौत हो जाए तो उसे \“Fatal Accident\“ यानी भीषण सड़क हादसा माना जाता है। 2022 में ऐसे 1,55,781 मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में बढ़कर 1,60,509 हो गए। यानी 3.04% की बढ़ोतरी।
राजमार्गों पर सबसे ज्यादा मौतें

2023 के आंकड़े बताते हैं कि देश के कुल सड़क नेटवर्क का सिर्फ 5% हिस्सा रखने वाले राजमार्गों पर 53% से अधिक दुर्घटनाएं और 59% मौतें दर्ज हुईं। साल 2023 में कुल दुर्घटनाओं में से 31.2% और कुल मृतकों में से 36.5% मामले राष्ट्रीय राजमार्गों पर ही हुए।

हादसों के प्रकार की बात करें तो पीछे से टक्कर मारने के मामलों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। 2023 में ऐसे हादसों में 20% लोगों की जान गई। हिट एंड रन में 18% और आमने-सामने की टक्कर में 16% लोगों की मौत हुई।
हादसों के मुख्य कारण

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023 में ओवरस्पीडिंग सबसे बड़ा कारण रही। कुल दुर्घटनाओं में 72.4% और कुल मौतों में 72.5% मामले तेज रफ्तार से जुड़े थे। इसके अलावा शराब पीकर गाड़ी चलाना, रेड लाइट जंप करना और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी बड़े कारण हैं।

गलत दिशा में वाहन चलाने (रॉन्ग साइड) के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यही वजह है कि सख्त नियमों के बावजूद सड़क हादसों में कमी नहीं आ पा रही है और कई परिवार साहिल की तरह अपने अपनों को खो रहे हैं।

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