ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम रोक के बाद यूरोपीय संघ ने मांगा स्पष्टीकरण (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के टैरिफ कार्यक्रम को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध ठहराए जाने के बाद ट्रांस-अटलांटिक व्यापार संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है। यूरोपीय संघ ने ट्रंप प्रशासन से पूरे मामले पर औपचारिक स्पष्टीकरण मांगा है और कहा है कि अमेरिका अदालत के आदेश के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता प्रदर्शित करे।
गौरतलब है कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन के टैरिफ कार्यक्रम को रद कर दिया था। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों की सीमा का अतिक्रमण किया।यूरोपीय आयोग ने कहा कि पिछले वर्ष अगस्त में दोनों पक्षों के बीच हुए ईयू-अमेरिका संयुक्त बयान की भावना मौजूदा परिस्थिति में कमजोर पड़ती दिख रही है।
क्या प्रविधान तय किया गया?
आयोग के अनुसार, निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी ट्रांस-अटलांटिक व्यापार और निवेश के लिए स्थिर नीति ढांचा आवश्यक है।पिछले वर्ष हुए व्यापार समझौते के तहत अमेरिका को निर्यात होने वाले लगभग 70 प्रतिशत यूरोपीय उत्पादों पर 15 प्रतिशत आयात शुल्क का प्रविधान तय किया गया था।
उल्लेखनीय है कि 27 सदस्य देशों वाला यूरोपीय संघ सामूहिक रूप से व्यापार नीति संचालित करता है और विश्व के सबसे बड़े एकीकृत बाजारों में से एक है।यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति के प्रमुख बर्न्ड लैंग ने रविवार को कहा कि वह वार्ता टीम के समक्ष इस समझौते की पुष्टि प्रक्रिया रोकने का प्रस्ताव रखेंगे।
उनके मुताबिक, “स्थिति अस्पष्ट है, कई सवाल अनसुलझे हैं और अनिश्चितता बढ़ रही है।\“\“अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच सालाना लगभग दो खरब डालर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि टैरिफ विवाद लंबा ¨खचता है तो आटोमोबाइल, एयरोस्पेस, कृषि और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
यूरोपीय आयोग ने क्या कहा?
यूरोपीय आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “समझौता, समझौता होता है। अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के रूप में यूरोपीय संघ अपेक्षा करता है कि संयुक्त वक्तव्य में तय प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाएगा। यूरोपीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी व्यवहार मिलता रहना चाहिए और पहले से निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।\“\“
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