search

‘सुरक्षित रक्त के अधिकार’ पर सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में NAT टेस्ट की लागत की मांगी जानकारी

LHC0088 Yesterday 20:27 views 867
  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को रक्त चढ़ाने से होने वाले एचआइवी और हेपेटाइटिस जैसे संक्रमण का पता लगाने के लिए न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन परीक्षण (एनएटी) करने की सुविधा के खर्च और उपलब्धता जैसी जानकारी मांगी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने जनहित याचिका दाखिल करने वाले \“सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन\“ की ओर से पक्ष रख रहे वकील ए. वेलन से पूछा कि एनएटी जांच करने में कितना खर्च आएगा और क्या यह सुविधा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है ताकि गरीब लोग भी इसका फायदा उठा सकें।
SC ने NAT जांच की लागत और उपलब्धता पर जानकारी मांगी

फाउंडेशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को याचिका में पक्षकार बनाया है। जनहित याचिका में केंद्र और राज्यों को यह घोषित करने का आदेश देने का अनुरोध किया गया है कि \“सुरक्षित रक्त का अधिकार\“ संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का एक अहम हिस्सा है।

इसमें यह भी मांग की गई है कि पूरे भारत में सभी ब्लड बैंकों में ट्रांसफ्यूजन ट्रांसमिसिबल इंफेक्शन (टीटीआइ) का पता लगाने के लिए एनएटी को अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि रक्त पाने वाले सभी लोगों को सुरक्षित और संक्रमण मुक्त रक्त मिल सके।
सुरक्षित रक्त के अधिकार को अनुच्छेद-21 का हिस्सा बताया

इसमें सभी रक्तदाताओं से लिए गए खून में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआइवी), हेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी), हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी), मलेरिया और सिफलिस की जांच शामिल है।

दिल्ली के एनजीओ ने खासतौर पर थैलेसीमिया से पीडि़त मरीजों को एचआइवी, एचसीवी और एचबीवी जैसे जानलेवा टीटीआई संक्रमण से बचाने में राज्य की \“नाकामी\“ को रेखांकित किया। याचिका में कहा गया है कि भारत में हजारों लोगों के लिए खून चढ़ाना \“मौत का जुआ\“ बन गया है।   
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
165798