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पहले काउंसलिंग, फिर कूल्हा प्रत्यारोपण! मुरादाबाद बना स्वास्थ्य सेवा का नया मॉडल, जानिए सफलता की कहानी

LHC0088 2025-12-12 19:37:33 views 1243
  

प्रतीकात्‍मक च‍ित्र



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) दिवस यानी स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर कार्य। गुरुवार को स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति का आकलन किया गया। इस वर्ष विशेष रूप से बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और जिला अस्पताल में कूल्हा-प्रत्यारोपण जैसी उन्नत सर्जरी में उपलब्धियां सामने आई। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

अपर निदेशक एवं प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. संगीता गुप्ता के अनुसार, विभाग ने पिछले एक वर्ष में बच्चों और किशोरों की मानसिक समस्याओं को लेकर जागरुकता अभियान चलाया। टीम ने जिले के 24 स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता कार्यक्रम संचालित किए। बच्चों को तनाव प्रबंधन, नशे से बचाव, भावनात्मक संतुलन, परीक्षा तनाव और अवसाद के शुरुआती लक्षण के बारे में जानकारी दी।

जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (डीएमएचपी) के इंचार्ज डा. धनंजय कुमार के अनुसार, कार्यक्रमों के दौरान दो हजार से अधिक बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई। कई बच्चों में एंजायटी, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याएं सामने आईं, जिन्हें समय रहते काउंसलिंग से जोड़ा गया।
मानसिक स्वास्थ्य की सप्ताह भर ओपीडी

जिला अस्पताल में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मेंटल हेल्थ ओपीडी संचालित की जा रही है। इसके अलावा मंगलवार और गुरुवार को सीएचसी पर ओपीडी होती है। इसके अतिरिक्त टेली-मनोपरामर्श के लिए हेल्पलाइन 1800-891-4416/14416 पर 24 घंटे विशेषज्ञों की व्यवस्था है। इस हेल्पलाइन का कई लोग आत्महत्या-निवारण और अवसाद से राहत पाने के लिए उपयोग कर रहे हैं।
कूल्हा प्रत्यारोपण में जिला अस्पताल की सफलता

वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं कार्यवाहक मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डा. शेर सिंह कक्कड़ के अनुसार, इस वर्ष सर्जरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। जिला अस्पताल में अब तक आठ कूल्हा प्रत्यारोपण और एक घुटना रिप्लेसमेंट किया जा चुका है। ये सर्जरी पहले प्राइवेट अस्पतालों में ढाई से तीन लाख रुपये के खर्च में संभव थीं।

अब जिला अस्पताल में विशेषज्ञ टीम द्वारा शुरू की गई है। इसमें अगर आयुष्मान कार्ड है तो पूरी तरह निश्शुल्क और रेडक्रास सोसायटी के माध्यम से भी उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बाद आयुष्मान कार्ड नहीं है और रेडक्रास में रुपया नहीं हुआ तो मरीज को उपकरण के रुपये खर्च करने होते हैं।
62 वर्षीय बुजुर्ग को मिला नया जीवन

कटघर निवासी 62 वर्षीय बुजुर्ग हादसे में घायल हो गए थे और उनके कूल्हे का जोड़ खराब हो गया था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण प्राइवेट अस्पताल में इलाज संभव नहीं था। जिला अस्पताल में उनकी जांच की गई और उन्हें कूल्हा-प्रत्यारोपण के लिए तैयार किया गया। सर्जरी सफल रही और कुछ हफ्तों की फिजियोथेरेपी के बाद मरीज अब बिना सहारे के चलने लगे हैं। यह जिला अस्पताल की सर्जिकल क्षमता पहले के मुकाबले और बेहतर हुई है।
14 वर्षीय बच्ची की बदली जिंदगी

कुंदरकी के एक स्कूल में पढ़ने वाली 14 वर्षीय छात्रा महीनों से क्लास में चुप रहती थी। पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। वह अक्सर सिरदर्द की शिकायत करती थी। स्क्रीनिंग के दौरान पाया कि वह एंजायटी डिसआर्डर से जूझ रही है। इसे जिला अस्पताल की काउंसलिंग से जोड़ा गया। तीन काउंसलिंग सेशन, परिवार के साथ बैठकर बातचीत और स्कूल अध्यापक के सहयोग से उसमें सुधार हुआ। आज वह कक्षा में सक्रिय है, पढ़ाई में प्रगति कर रही है।

  

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