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डायबिटिक फुट का खतरा होगा कम! बस इन 6 Secret Hacks से रखें पैरों और सेहत का ख्याल

LHC0088 2025-10-11 14:36:05 views 1251
  

डायबिटीज में पैरों की देखभाल: डायबिटिक फुट से बचने के आसान उपाय (Picture Credit- Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। डायबिटीज मरीजों की हार्ड स्किन, पैरों के नाखूनों का सही तरीके से ना बढ़ना, पैरों पर कट लगने या फफोले होने से जख्म होने का खतरा बढ़ जाता है। यह डायबिटिक फुट का भी कारण बन सकता है। ऐसे में अगर पैरों का पूरा ख्याल ना रखा जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

डायबिटीज से पीड़ित लोगों को पैरों से जुड़ी किसी भी प्रकार की परेशानी से बचने के लिए हर दिन अपने पैरों को चेक करना और ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं, डायबिटीज मरीज किस तरह अपने पैरों का ख्याल रख सकते हैं।
रोजाना चेक करें

  • फफोले या कट लगना

  • स्किन का सख्त होना

  • कोई जख्म

  • स्किन के रंग में अचानक बदलाव

  • स्किन का क्रैक हो जाना


  
इस तरह लगाएं इंफेक्शन का पता


  • त्वचा का लाल हो जाना

  • पस या पानी निकलना

  • स्किन पर गर्माहट महसूस होना

  • बुखार या ठंड लगना

  • सूजन

  • बदबू आना या दर्द होना

पैरों को ऐसे रखें साफ

  • पैरों को रोजाना साबुन और पानी से धोएं और अंगूठों के बीच भी अच्छी तरह स्किन पोंछकर ड्राई करें। अगर अंगूठे के बीच स्किन सफेद नजर आ रही है तो यह नमी की वजह से हो सकता है।
  • पैरों को साफ करने के बाद मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं, लेकिन अंगूठों के बीच लगाने से बचें।
  • हार्ड स्किन या कॉर्न को अच्छी तरह फाइल करके हटाएं।
  • पैरों के नाखून नियमित रूप से काटते रहें और नाखूनों के किनारों को फाइलर से फाइल करें।

जूते पहनने से पहले

डायबिटीज मरीजों को हमेशा ही अपने पैरों में चोट लगने से बचाने की जरूरत है। इसलिए जब भी जूते पहनें एक बार अच्छी तरह अंदर तक झाड़ लें कि उसमें कोई शार्प चीज तो नहीं। जूतों के साथ हमेशा ही मोजे या स्टॉकिंग्स पहनें, इससे स्किन रगड़ने से घाव होने का खतरा नहीं रहेगा।
ब्लड शुगर लेवल रखें नियंत्रित

डायबिटीज में ब्लड शुगर का स्तर बहुत ज्यादा या कम होना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में उसे नियंत्रित रखने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
पैरों की हर साल कराएं जांच

डायबिटीज मरीजों के लिए साल में कम से कम एक बार अपने पैरों की जांच कराना बेहद जरूरी है। पैरों की स्क्रीनिंग या जांच के दौरान उनकी सेंसेशन का पता लगाया जाता है और पैरों से जुड़ी किसी भी प्रकार की परेशानी के बारे में पहले ही सतर्क कर दिया जाता है।

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