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जालंधर: पठानकोट चौक पर सजी मार्केट में ग्रीन पटाखों का जलवा, दो दिन में करोड़ों की बिक्री कर पाएंगे दुकानदार?

Chikheang 2025-10-20 19:06:42 views 653
  

दो दिन में करोड़ों का पटाखा बेचना बना चुनौती, देर रात तक खुली मार्केट (प्रतीकात्मक फोटो)



जागरण संवाददाता, जालंधर। जिला प्रशासन की ओर से पटाखा मार्केट सजाने को लेकर चल रही कशमकश के बीच पठानकोट चौक के पास पटाखा मार्केट स्थापित की गई है। हालांकि दुकानदारों के लिए करोड़ों रुपये का पटाखा बेचना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस दौरान पठानकोट बाईपास के पास सजी मार्केट में पटाखा व्यापारी देर रात तक अपनी दुकानें खोले हुए हैं, जहां खरीदार भी पहुंच रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जानकारी के अनुसार कई दुकानदार लोगों की मांग पर उन्हें घर तक पटाखों की सप्लाई भी कर रहे हैं। बर्ल्टन पार्क में पिछले दो दशकों से पटाखे की दुकानें सजाई जा रही थीं। लेकिन सरफेस वाटर प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद शहर में किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर पटाखा मार्केट शिफ्ट करने की प्रक्रिया में लगभग एक माह तक कशमकश चलती रही।  

इसके लिए नकोदर रोड स्थित लायलपुर खालसा स्कूल और चारा मंडी स्थान निर्धारित किए गए थे, लेकिन दोनों जगहों पर आपत्तियां आने के बाद फोकल प्वाइंट स्थित सिंह बेअंत सिंह पार्क में पटाखा मार्केट सजाने पर सहमति बनी और इसके लिए एनओसी भी जारी की गई। हालांकि, उद्योगपतियों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद प्रशासन ने नए सिरे से जमीन तलाशना शुरू किया, जो अंततः पठानकोट बाईपास पर जाकर पूरी हुई।

यहां भी दुकानें लगाने और कारोबार शुरू करने में नगर निगम और जीएसटी की टीमों के आने से व्यापारियों की समस्याएं बढ़ गईं। यही कारण रहा कि इस बार पटाखा बेचने वाले व्यापारियों ने धनतेरस के दिन ही अपनी दुकानें सजाई हैं। व्यापारियों का कहना है कि दो दिनों में करोड़ों का पटाखा बेचना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसके लिए सरकार को पहले से राहत देनी चाहिए थी।

पटाखा कारोबारी रवि महाजन बताते हैं कि व्यापारियों को वर्ष भर इस त्योहार का इंतजार रहता है, लेकिन समय आने पर उन्हें दुकान हासिल करने के लिए कई तरह की जद्देजहद करनी पड़ती है। ऐसे में व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इनके लिए नियमित रूप से प्रबंध करना चाहिए। इसी तरह पटाखा कारोबारी विकास भंडारी ने कहा कि वर्ष भर में मनाए जाते उत्सवों में सबसे बड़ा पर्व दीपावली का है।

आतिशबाजी के बिना रोशनी का यह त्योहार फीका है। ऐसे में इस पवित्र त्योहार को लेकर व्यापारियों के हितों का ध्यान रखते हुए उन्हें नियमित रूप से ऐसा स्थान देना चाहिए जहां पर वह हर वर्ष आसानी से पटाखे की बिक्री कर सकें।

इसी तरह पटाखा कारोबारी राघव महाजन ने कहा कि सरकार तथा प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पटाखा व्यापारियों ने इस बार ग्रीन पटाखे की बिक्री पर ही तवज्जो दी है। उन्होंने कहा कि पटाखे निर्माण की सबसे बड़ी मार्केट शिवाकाशी में अधिकतर पटाखा कारोबारी अब ग्रीन पटाखे तैयार करते तथा सप्लाई करते हैं। ऐसे में दुकानदार भी इनकी बिक्री ही करते है।
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