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जाजमऊ के टेनरी में जहरीली गैस का रिसवा, चपेट में आने से मजदूर की मौत

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जागरण संवाददाता, कानपुर। जाजमऊ की एक टेनरी में बुधवार को चमड़ा सफाई करते समय लकड़ी के ढोल से निकली जहरीली गैस की चपेट में आने से मजदूर बेसुध हो गया। साथी कर्मी उसे पहले निजी अस्पताल फिर रीजेंसी अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान गुरुवार को उनकी मौत हो गई।

आरोप है कि टेनरी संचालक मामले को पहले दबाए रहे, लेकिन कर्मचारियों के कहने पर दो घंटे बाद स्वजन को घटना की जानकारी दी। थी। इससे भड़के स्वजन गुरुवार सुबह टेनरी संचालक के घर पहुंचे और हंगामा कर मुआवजे की मांग की। जाजमऊ थाना पुलिस पहुंची। इसके बाद संचालक ने मुआवजे में आठ लाख की चेक स्वजन को दी। तब मामला शांत हुआ।


महाराजपुर के विजय नगर मथुराखेड़ा निवासी 37 वर्षीय शिवकुमार जाजमऊ के संजय नगर स्थित हुमेरा टेनरी में 15 साल से ढोल चलाने का काम करते थे। परिवार में पत्नी शारदा, बेटा संदीप, हिमांशु, मयंक व बेटी राधिका हैं। शिवकुमार के शुक्लागंज निवासी ससुर शिवभक्त के मुताबिक, दामाद बुधवार को चमड़ा साफ करने के लिए टेनरी में ढोल चला रहे थे, तभी ढोल से जहरीली गैस निकली और चपेट में आने से वह बेहोश हो गया।

टेनरी के कर्मचारी उन्हें पास के एक अस्पताल ले गए, जहां से दूसरे अस्पताल भेजा गया, जिस पर रीजेंसी में भर्ती कराया गया। गुरुवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद स्वजन टेनरी संचालक पर लापरवाही से काम कराने का आरोप लगा मुआवजे की मांग करने के लिए टेनरी संचालक संचालक रिजवान के डिफेंस कालोनी स्थित घर का घेराव करने लगे।

स्वजन ने 20 लाख की मांग की। जाजमऊ थाना पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया। थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि टेनरी संचालक ने दिवंगत के परिवार को आठ लाख रुपये की चेक दी है। मामला शांत हो गया है। अगर परिवार तहरीर देता है, तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
चमड़ा साफ करने में ढोल में होता चूना, तेजाब, नमक समेत केमिकल का उपयोग

चमड़े के बाल साफ करने के लिए एक लकड़ी का ड्रम प्रयोग में लाया जाता है, जिसे ढोल भी कहते हैं। इसमें चूना, नमक और तेजाब समेत अन्य केमिकल डालकर घुमाया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान हाइड्रोजन सल्फाइड गैस निकलती है। चूना हटाने की प्रक्रिया में अमोनिया निकलती है। इसके अलावा आधुनिक टैनिंग विधियों से चूना निकालने के लिए कभी-कभी कार्बन डाइआक्साइड गैस का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में भी गैस निकलती है, जो स्वास्थ्य समेत पर्यावरण के लिए हानिकारक होती है, फिर चमड़ा साफ होने के बाद जब ड्रम को खोला जाता है तो झाग के रूप में लिक्विड निकलता है, इसके साथ यह गैस निकलती हैं, जिसकी चपेट में आए मजदूर की मौत हुई है।
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