बाबा लंगटनाथ धाम
संवादसूत्र,उदवंंतनगर(भोजपुर)। उदवंतनगर प्रखंड क्षेत्र में स्थित बाबा लंगटनाथ धाम प्राचीन आस्था का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यह स्थल महाभारत कालीन शिव तीर्थों में शुमार है। जिला मुख्यालय आरा से लगभग 10 किलोमीटर दूर सोनपुरा पंचायत के निर्जन इलाके में मंदिर स्थित है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। फाल्गुनी और सावनी महाशिवरात्रि पर हजारों शिवभक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। पूरे क्षेत्र में इस धाम की गहरी धार्मिक पहचान है।
बाणासुर से जुड़ी पौराणिक कथा
पंडितों के अनुसार शिव महापुराण और श्रीमद्भागवत महापुराण में इसका उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार त्रिलोक विजयी राक्षसराज बाणासुर भगवान शिव के परम भक्त थे। उनकी राजधानी षोणितपुर बताई गई है, जिसे वर्तमान भोजपुर जिले के मसाढ़ गांव से जोड़ा जाता है।
मसाढ़ से लगभग पांच किलोमीटर दूर यह प्राचीन शिव मंदिर अवस्थित है। मंदिर परिसर में नंदी, गणेश और माता पार्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं। प्रवेश द्वार के दाहिनी ओर हनुमान जी तथा बाहर शिव परिवार की मूर्तियां हैं।
ऊषा–अनिरुद्ध मिलन के साक्षी
मान्यता है कि बाणासुर की पुत्री ऊषा और भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के प्रेम प्रसंग से यह स्थल जुड़ा है। कथा के अनुसार अनिरुद्ध को बाणासुर ने बंदी बना लिया था। इसके बाद भगवान कृष्ण और भगवान शिव के बीच युद्ध हुआ।
युद्ध में शिव मूर्छित हुए और कृष्ण ने बाणासुर की अनेक भुजाएं काट दीं। अंततः ऊषा और अनिरुद्ध का मिलन हुआ। इसी प्रसंग को देव और आसुरी संस्कृति के मिलन का प्रतीक माना जाता है।
महाशिवरात्रि पर लगता है ग्रामीण मेला
बाबा लंगटनाथ धाम में हर वर्ष फाल्गुनी और सावनी महाशिवरात्रि पर भव्य मेला लगता है। दूर-दराज से श्रद्धालु और ग्रामीण बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। मेले में कृषि उपकरण, घरेलू सामान और पारंपरिक लोहे के औजारों की बिक्री होती है।
स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों के लिए यह मेला विशेष महत्व रखता है। आस्था और लोक संस्कृति का सुंदर संगम यहां देखने को मिलता है।
मंदिर कैसे पहुंचें
सड़क मार्ग से आरा-मोहनिया एनएच-30 और आरा-सासाराम राजकीय राजमार्ग-12 के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है, जबकि आरा नजदीकी रेलवे स्टेशन है।
हर वर्ष लगता है ग्रामीण मेला
बाबा लंगटनाथ धाम में हर वर्ष फाल्गुनी व सावनी महाशिवरात्रि के अवसर पर ग्रामीण मेले का आयोजन किया जाता है जिसे देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु एवं आमजन आते हैं. मेले में कृषि उपकरण, घरेलू कार्य के उपयोग में आने वाली सामग्री, पारंपरिक लोहे के हथियार अन्य सामग्रियां मिलती है. |
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