Aaj ka Panchang 19 February 2026: फुलेरा दूज के शुभ-अशुभ योग
आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। आज यानी 19 फरवरी को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस तिथि पर हर साल फुलेरा दूज (Phulera Dooj 2026 Date) मनाई जाती है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी को समर्पित है। इस खास अवसर पर राधा-कृष्ण की पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रभु की साधना करने से वैवाहिक जीवन खुशियों का आगमन होता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस तिथि पर कई योग भी बन रहे हैं। आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 19 February 2026) के बारे में।
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तिथि: शुक्ल द्वितीया
मास: फाल्गुन
दिन: गुरुवार
संवत्: 2082
तिथि: शुक्ल द्वितीया – सायं 03 बजकर 58 मिनट तक
योग: सिद्ध – सायं 08 बजकर 42 मिनट तक
करण: कौलव – सायं 03 बजकर 58 मिनट तक
करण: तैतिल – प्रातः 03 बजकर 21 मिनट तक (20 फरवरी)
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय का समय: प्रातः 06 बजकर 56 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 14 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: प्रातः 07 बजकर 54 मिनट पर
चंद्रास्त का समय: सायं 08 बजकर 11 मिनट पर
सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: कुंभ राशि में स्थित हैं (दोपहर 03:00 बजे तक)
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक
अमृत काल: दोपहर 01 बजे से दोपहर 02 बजकर 34 मिनट तक
आज के अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 02 बजे से दोपहर 03 बजकर 25 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 09 बजकर 46 मिनट से प्रातः 11 बजकर 10 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 06 बजकर 56 मिनट से प्रातः 08 बजकर 21 मिनट तक
आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र: सायं 08 बजकर 52 मिनट तक
नक्षत्र स्वामी: बृहस्पतिदेव
राशि स्वामी: शनिदेव और बृहस्पतिदेव
देवता: अज एकपाद (अग्नि के रुद्र रूप)
प्रतीक: शवपेटिका या अर्थी (मृत्यु के पश्चात प्रयुक्त होने वाला वाहन)
सामान्य विशेषताएं: आशावादी, ईमानदार, विश्वसनीय, संगीत-प्रेमी, कला-प्रेमी, विनम्र, उदार, बुद्धिमान, वक्ता, संवेदनशील, ईर्ष्यालु, लालची, क्रोधी, अनिश्चित।
फुलेरा दूज का धार्मिक महत्व
फुलेरा दूज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला एक पावन उत्सव है। यह पर्व विशेष रूप से राधा-कृष्ण की आराधना से जुडा होता है। इस दिन मंदिरो में ठाकुर जी को फूलो से सजाया जाता है और गुलाल अर्पित किया जाता है।
मान्यता है कि फुलेरा दूज से होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन विवाह, मांगलिक कार्य और नए शुभ कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। भक्तजन भजन-कीर्तन करते हैं और प्रेम व उल्लास के साथ इस पर्व को मनाते हैं।
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